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रविवार, 21 अप्रैल 2013

दामिनी आंदोलन: पुलिस व्यवस्था में बुनियादी जनतांत्रिक सुधार: आम चर्चा के लिए एक आधार भूमिका


कल मुख्य  रूप से मैंने तीन मुद्दों को उठाया. सुबह के वक्त महिला उत्पीडन विरोधी मुहल्ला समिति की भूमिका. जिसे अनेक जगह प्रसारित भी किया गया. अनेक लोगों ने फेसबुक और ट्विटर में इसके साथ सहमती भी जाहिर की और अपने विचार भी रखे. आशा है कि इस मुद्दे पे यहां जो अलग से ब्लॉग है, वहां भी सभी साथी अपने सुझाव-विचार ज़रूर ही रखते जाएंगे. ये सुझाव आगे काफी काम के साबित होने वाले.



कल ही मैंने पुलिस व्यवस्था में बुनियादी सुझाव, जनतांत्रिक बदलाव की चर्चा शुरू करने का प्रयास किया, मगर दिल्ली में बलात्कार विरोधी आंदोलन पे पुलिस कार्रवाई हो जाने से अफरा-तफरी में अनेक साथी इस चर्चा में भाग नहीं ले पाए. वे सभी साथी इस ब्लॉग के जरिए चर्चा करें. अपने सुझाव दें.

कल ही रात में मैंने दामिनी आंदोलन के चरित्र से जुड़े विन्दुओं को उठाने की कोशिश की. उसपे भी खास चर्चा संभव नहीं हो पायी. कुछ साथी ज़रूर चर्चा में शामिल हुए. लेकिन, इसपे भी व्यापक-विस्तृत चर्चा की सख्त ज़रूरत है... सो, इस ब्लॉग में सभी अपने विचार रखे. चर्चा करें, तो अच्छा हो.
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पुलिस व्यवस्था में बुनियादी जनतांत्रिक सुधार: आम चर्चा के लिए एक आधार भूमिका  
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अन्ना आंदोलन की एक बड़ी मांग है पुलिस व्यवस्था में हो बुनियादी बदलाव. अब यह मांग जोर पकड़ने
लगी है. मगर
, कैसा हो बदलाव?

जैसे-जैसे भ्रष्ट नेताओं-मंत्रियों की फौज बढ़ती जारही
, वैसे ही पुलिस का रवैया ज्यादा से ज्यादा जनविरोधी होता जा रहा.तो दुहरे बदलाव की ज़रूरत.

जब तक भ्रष्ट नेताओं-सरकारों पे सख्त जनलोकपाल और सख्त जनलोकायुक्त की लगाम नहीं लगती
, पुलिस व्यवस्था में जनपक्षी बदलाव लाना बहुत मुश्किल.

भ्रष्ट सरकारो व नेताओं के रहते भी भारी जन दबाव में अगर पुलिस व्यवस्था में बुनियादी बदलाव ले भी आया गया तो उसे लागू करना ही मुश्किल.

अन्नाआंदोलन ने सबसे पहले नेताओं-सरकारों के भ्रष्टाचार पे लगाम लगाने केलिए जनलोकपाल व जनलोकायुक्त की मांग की.वरना कोई भी सक्षम क़ानून बेकार.

बहरहाल
, जनलोकपाल की लड़ाई जारी है,जारी रहेगी. मगर पुलिस व्यवस्था में बुनियादी बदलाव भी उतना ही ज़रुरी. सो, कैसा हो ये बदलाव? इसपे चर्चा हो.

इस मुद्दे पे जब चर्चा की बात की गयी तो एक जवाब ऐसा आया :

#Ajay @Ajaykumar26515h
@kiran_patniak उस से काया हॊगा किरन जी जब तक ये चोर लूटेरे बल्त्कारी संसद में हैकुछ नहीं हो सकता।पहले संसद की सफाई करनी पड़ेगी फिर दूजा काम


इसका जवाब:


१.
kiran patnaik @kiran_patniak14h
@Ajaykumar265 बिना जन-सैद्धांतिक धरातल के कोई भी बुनियादी बदलाव असम्भव है. सो, सिद्धांत निर्माण का कार्य सबसे ज़रुरी.


२.
kiran patnaik @kiran_patniak14h
@Ajaykumar265 २.अनेक कथित क्रांतिकारी बिना सैद्धांतिक आधार के ही "क्रान्ति" करने चल पड़ते, और बाद में खुद भी व्यवस्था के शिकार बनते जाते
@Ajaykumar265 ३. देश-समाज-संसद-विधानसभाओं की सफाई करनेवालों की सफाई करता है जनहितकारी सिद्धांत.



इन जवाबों का कोई जवाब अब तक नहीं आया, जबकि काफी समय हो चुका.

बलात्कार के विरुद्ध चीखनेवाले राजनीतिकों में न तो महिला उत्पीडन विरोधी मुहल्ला समिति में रूचि दिख रही
, न पुलिस व्यवस्था के बदलाव में!!
जो लोग बलात्कार विरोधी आंदोलन के बहाने अपनी पार्टी और नेताओं के ही प्रचार में लगे हुए हों, उनसे किसी बुनियादी बदलाव की आशा रखना ठीक नहीं.

सडकों पे शोर मचाया जाय या संसद के अंदर
, नतीजा क्यों सिफर निकल रहा? इसपे जब तक विचार नहीं किया जाएगा, कोई बुनियादी सुधार संभव नहीं.

इसके बाद ये सवाल पूछा गया :

 देश की किसी भी छोटी-बड़ी पार्टी के पास क्या पुलिस व्यवस्था में बुनियादी जनता-पक्षी बदलाव का मसौदा तैयार है
?

 इसका भी कोई जवाब नहीं आया. इससे पता चलता है कि बलात्कार विरोधी आंदोलन में शामिल दल इस मुद्दे को लेकर कितने गंभीर हैं!!

जिनके पास पुलिस व्यवस्था में बुनियादी बदलाव का मसौदा ही नहीं
, वे क्या ख़ाक महिला सुरक्षा की लड़ाई लड़ेंगे!! चुनावी मुहिम भर चला सकते.

जो साथी इस मुद्दे पे गंभीर हैं, वे अपने विचार ज़रूर रखें. और, चर्चा को आगे बढा कर बलात्कार विरोधी आंदोलन को, महिला सुरक्षा मुद्दे को आगे बढाने में सहयोग दें.

इसके बाद का ब्लॉग होगा दामिनी आंदोलन का चरित्र. जो आज या कल में ही प्रसारित कर दिया जाएगा.
SEVEN STEPS TO POLICE REFORM:

पुलिस में पहल : कर्नाटक में चले एक कार्यक्रम के नतीजे दर्शाते कि अगर कोशिश की जाए तो पुलिस की यह छवि बदल सकती है:


जो दल-संगठन ईमानदारी से बलात्कार के खिलाफ आंदोलन कर रहेवे महिला उत्पीडन विरोधीमुहल्ला समिति बनाने की पहल करें: kiranshankarpatnaik.blogspot.in/2013/04/blog-p

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