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गुरुवार, 9 अगस्त 2012

अरविन्द जी, आपके मन में खोट है....!!

   मैं चुनाव नहीं लडूंगा और न ही सत्ता में शामिल होऊंगा. मैं बाहर रह कर इन लोगों पर नज़र रखूंगा. अगर ये कोई गलती करेंगे तो कान मरोड़ कर इन्हें ठीक करूंगा---- अन्ना हजारे...

ये बात अन्ना ने जब कही थी, उसके बाद के उनके दो ब्लॉग पढ़ लें... खासकर पहला ब्लॉग..उसमें भी साफ़ कहा गया है कि पहले गांवों-मुहल्लों में जाकर जनलोकपाल आन्दोलन करो..और वहीं अपने सामने लोगों की राय लो, स्वस्थ विकल्प बनाने के बारे में.  
(अन्ना के वो दोनों ब्लॉग अब एकदम नीचे की दोनों लिंक में नहीं है, जो ५-६ अगस्त के थे. वो ब्लॉग खोजके पढ़ लिये जाएँ.) {नौ नंबर विन्दु में अन्ना द्वारा अपने साथियों की जान बचाने के बारे में लिखा है. देखें. उसको ही ये अरविन्द टीम वाले सामने रखते हैं.अन्ना की बाकी सब बातों की अनदेखी करते.} [इस ब्लॉग में बस इतना ही सम्पादित किया गया. इतनी ही बात जोड़ी गयी. बाकी सब ५-६ अगस्त की ही बातें जस की तस हैं.]

प्रिय अरविन्द केजरीवाल,
सप्रेम वंदे.
आपके पत्र के पहले ही पैराग्राफ में अनेक अर्द्ध सत्य व भ्रामक बातें हैं.

http://mayankgandhi05.blogspot.in/2012/08/arvinds-letter-to-volunteers-after-fast.html

 १. आपने लिखा कि ..
हालांकि आम जनता ने आन्दोलन के लक्ष्य को हासिल करने के हमारी राजनैतिक विकल्प देने की पहल का स्वागत किया है. .. किस आम जनता की बात कर रहे आप? वो जो जंतर-मंतर में थी?? अगर, उसकी बातों को मान भी लिया जाय, तो वो जनता क्या पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है? नहीं न ??

२. फिर आप एक बहुत ही सतही बात लिखते हैं, जिससे पता चलता है कि आप इस देश को जानते ही नहीं... आप लिखते हैं...
विभिन्न चैनलों के सर्वे के मुताबिक़ और आई ए सी के अपने सर्वे के मुताबिक़ ९० प्रतिशत जनता ने इस निर्णय का स्वागत किया है.... आप चैनलों के सर्वेक्षण को देश की आम जनता की राय बता कर खुद को एकदम सतही व्यक्ति बना रहे हो. इस तरह के सर्वेक्षण से क्या इस देश में कोई स्वस्थ राजनीतिक विकल्प बनेगा? क्या बकवास बात है!! मुझे तो आपकी बुद्धि-विवेक पे अब तरस आने लगा है.... और, आई ए सी ने कब ये सर्वे कराया? क्या आप उस एस एम एस सर्वे का तो हवाला नहीं दे रहे, जिसमें हाँ या नहीं में जवाब माँगा गया है? अगर आप इसी सर्वे की बात कर रहे, तो फिर तो आपकी और आपके साथी सलाहकारों की बुद्धि की बलिहारी. इससे भी यही पता चलता कि आपलोग कितने सतही हो और इस देश को असल में शून्य जानते हो.!!

३. फिर आप लिखते हैं
.... हालांकि ऐसे साथियों की संख्या कम है. .. आपने ये कैसे जान लिया कि ऐसे साथियों की संख्या कम है? क्या टीवी वाले सर्वेक्षण से? या अपने आई ए सी के उस बेकार एस एम एस से?? आपके चरों ओर क्या चमचों की ही फ़ौज जुटी रहती है? जो आप उनसे बाहर की दुनिया देख नहीं पा रहे?? या फिर आपने जान-बूझ कर शुतुरमुर्ग जैसी सोच बना ली है? बाहर आके देखें तो आपको पता चलेगा कि आप जिन त्यागी और चमचागिरी से दूर साथियों की बात कर रहे हैं, उनका ९० फीसदी आपके शौकिया विकल्प के पक्ष में नहीं... वो तो अन्ना के रास्ते चलना चाहता. (कृपया अन्ना का इस सिलसिले का पहला ब्लॉग पढ़ें...... ). उसमें स्वस्थ विकल्प की बात तो है, मगर वो किस प्रक्रिया में बने, ये भी स्पष्ट लिखा हुआ है. उस ब्लॉग को पढ़ने के बाद भी आपका यह आधा-अधूरा और बड़े हद तक मिथ्यापूर्ण पत्र आने का अर्थ ये हुआ कि आपकी नीयत में जरुर कोई न कोई खोट है. वो खोट क्या है, आप खुद बता दें... तो अच्छा..वरना, मुझे पता है कि वो क्या खोट है. उसपे बाद में..

४. पहले पैरा में ही आपने एक जगह लिखा है...
किसी भी निर्णय से १०० प्रतिशत लोग सहमत नहीं हो सकते. एकदम सच बात. और, आपके इस निर्णय से सचमुच सौ फीसदी लोग सहमत नहीं....सिर्फ नब्बे फीसदी लोग ही आपसे असहमत हैं... (इस तरह की चालाकी भरी बातें अच्छे आंदोलनकारियों को शोभा नहीं देतीं).

५. आप बार-बार आमरण अनशन तोड़ने पे इतनी सफाई क्यों दे रहे, वो भी अपनी
ईमानदारी के हवाले से? हम जैसे अन्ना आन्दोलनकारी कभी चाहते ही नहीं कि हमारा कोई साथी इस तरह शहीद हो जाय. या आम शब्दों में कहा जाय तो.. मर जाय. आपलोगों ने आमरण अनशन तोड़ कर बहुत अच्छा काम किया. जो लोग इसपे सवाल उठा रहे, वे असल में हमारे साथी नहीं, बल्कि दूसरे एक-दो संगठनों के घुसपैठिये हैं. उनकी क्या परवाह करना? (इस बारे में मैंने अपने ब्लॉग में लिखा भी है..देखा होगा.  नहीं तो देखें........)

६. इसके बाद आपने लिखा है...
इस दौरान अन्ना जी हमारी सेहत पे नज़र बनाए हुए थे................. ..... ..... देश भर से अन्ना जी को सन्देश भी आ रहे थे.... :) यहां बड़ा लोचा है. यानि गडबड है. आमरण अनशन के मामले में आपलोगों ने कोई ड्रामा नहीं किया. इसमें अनेक सच्चे अन्ना आंदोलनकारियों को कोई संदेह नहीं. मगर, इस पैराग्राफ में आपलोगों की ड्रामे बाजी साफ़ दिख रही... आप अन्ना जी की बात कितनी मानते हो, ये हम देख रहे. लेकिन, यहां बड़ी चतुराई से अन्ना को अपनी ढाल जरुर बना रहे. सरकार एसआईटी और जनलोकपाल की बात नहीं मानेगी, ये बात तो अन्ना और सभी समझदार आंदोलनकारियों को २५ जुलाई आन्दोलन की घोषणा के पहले से ही पता था. इसमें नयी क्या बात थी. अन्ना भी पहले से ही ये सब जानते रहे. फिर आप उनका नाम लेकर अपना बचाव क्यों कर रहे? ये है आपकी कमी या कोई खोट.
 
इसी पैरा में आपने लिखा कि
तीसरे-चौथे दिन से ही जनता के बीच से आवाजें आने लगी कि अन्ना जी को देश को राजनीतिक विकल्प देना चाहिए. लोग इस बारे में नारे लगा रहे थे. पर्चे बाँट रहे थे, बैनर लेकर खड़े थे. देश भर से अन्ना जी के पास इस तरह के सन्देश भी आ रहे थे. .. वाह. क्या सीन बनाया है अपने!! शाब्बाश!! ये है असली ड्रामा. समझे. सब आपकी वेतनभोगी कार्यकर्ताओं के कारनामे थे. और, अब भी आपके अनेक वेतनभोगी कार्यकर्ता इस सिलसिले में बड़े सक्रिय हैं. और मेरे जैसों के पास आकर कुछ गाली-गलौज भी कर रहे, ठीक संघियों की स्टाईल में.

   अपने ब्लॉग में एक जगह मैंने ये भी लिखा है...
५. अरविन्द व अन्य साथी क्यों आमरण अनशन करने की जिद पे अड़े रहे? इस सवाल का जवाब वे खुद यहां दें तो बेहतर. (वैसे यह प्रक्रिया और इसके पीछे की मानसिकता मैं अच्छी तरह समझ रहा, जिसपे फिर कभी.).
ये जो कोष्ठक में मैंने
मानसिकता की बात लिखी है, उसी मानसिकता की वजह से आपने आमरण अनशन का नारा दिया और उसकी समाप्ति का भी पहले से ही इंतजाम कर लिया... इस मानसिकता के बारे में आप खुद बता दें..वरना, मैं ही बताऊंगा फिर कभी.

http://kiranshankarpatnaik.blogspot.in/2012/08/blog-post.html

७. इसके अगले पैराग्राफ में भी आप
तिल को ताड़ बना कर पेश कर रहे. ये सही है कि पिछले अगस्त में जैसा समर्थन अन्ना के आमरण अनशन को मिला था, वैसा इस बार आपको नहीं मिला. भले ही अन्ना ने आपका पूरा साथ दिया, मगर लोग जान रहे थे कि ये अन्ना को अपदस्थ करने की आपलोगों की एक चाल ही है...बहरहाल, फिर भी मुंबई-बंगलोर, चेन्नई आदि अनेक स्थानों में ये आन्दोलन बड़े हद तक सफल रहा, जिसका आप उल्लेख करना जरुरी नहीं समझ रहे. क्यों? ये आप अच्छी तरह जानते....(इसके अलावा, अन्ना के महाराष्ट्र दौरे में उमडती आम जनता का भी आपने जिक्र नहीं किया.)
 
आप फिर से झूठ बोल रहे कि लोगों का भरोसा टूटता देख और लोगों के सन्देश आता देख आपने आमरण अनशन तोड़ने और विकल्प देने की घोषणा की. लोगों का भरोसा अन्ना आन्दोलन से नहीं टूटा है, न टूटेगा, बशर्ते कि आपलोग जी-जान लगा कर उसे तोड़ न दें... हाँ, आप पर से जरुर टूटा है..खासकर आपकी ये सब नौटंकी देखने के बाद... और, देश भर से आ रहे
सन्देश भी असल में आपके द्वारा प्रायोजित ही थे.

८. इसके अगले पैर ग्राफ में आप लिखते हैं...
अनशन के नौवें दिन देश के २३ महानुभावों की चिट्ठी प्राप्त हुई. जिसमें उन्होंने अनशन समाप्त कर देश को राजनैतिक विकल्प देने की अपील की. बहुत बढ़िया. एक तरफ आम जनता सामने खड़े होके मांग कर रही, दूसरी ओर सन्देश पे सन्देश आ रहे. और ऊपर से ये २३ महानुभाव... एकदम सही स्किप्ट है. वेरी गुड. आपलोग अब मुम्बैया फिल्मों में जाके कोई सस्पेंस स्क्रिप्ट लिखे. इस जन आन्दोलन का पीछा छोड़ दें. (ये सब मैं भारी मन से लिख रहा. शैली की जगह इसके सार पे ध्यान दें).
  इसी पैरा में आपने जिस एस एम एस और टीवी सर्वे का जिक्र किया है, उस बारे मैं ऊपर लिख चुका. दलाल चैनलों पे आपको इतना भरोसा?? समझ से परे.

९. इसके बाद के पैरा में फिर आपने अन्ना को अपनी ढाल बनायी है. अन्ना को उस वक्त जो उपाय आपने
मुहैया कराया वे उसी उपाय के जरिए आपलोगों की जान बचाई. आखिर बाप हैं, अपने बच्चों को मरता कैसे देख सकते.

अब मैं आपको जवाब देते-देते बोर हो गया...लेकिन, आपकी बकवास जारी है, सो देना ही पड़ेगा.

१०. कोई असल सर्वे हुआ नहीं है. बार-बार ९० फीसदी जनता के समर्थन का दावा करना कुछ वैसा ही है, जैसे  कि भ्रष्ट कांग्रेसी सरकार अपने को
चुनी हुई सरकार बताती है. उसका चुनाव तो फिर भी आम मतदाताओं के एक छोटे से हिस्से ने किया ही है, जबकि   आपके पास कुछ वफादार कार्यकर्ताओं के अलावा ऐसा कुछ नहीं है... सो, ये ९० फीसदी का एकदम झूठा राग कहीं ऐसी जगह सुनाएं, जिन्हें देश का कुछ पता नहीं.... आप जन भावनाओं की कद्र... का भी इस्तेमाल इस तरह कर रहे, जैसे कि कांग्रेसी या अन्य कोई भ्रष्ट सरकार किया करती है.. गाहे-बगाहे.

फिलहाल मैं पूरा बोर हो गया हूं, आपकी बकवास का जवाब देते हुए.... आपके और आपके कुछ साथियों के मन में सचमुच खोट नहीं है तो अन्ना के बताए उस सही रास्ते से
स्वस्थ राजनीतिक विकल्प बनाने के काम करें... आखिर आपने अपने इस पत्र में खुद को अन्ना का बड़ा भक्त भी दिखाया है... सो, उनके पहले ब्लॉग में लिखे अनुसार गांवों में जाएँ..मुहल्लों में जाएँ..वहां जन लोकपाल, पूर्ण चुनाव सुधार आदि आन्दोलन चलाते हुए आमने-सामने बैठ कर विकल्प पे राय लें. लिखित में भी.सबके नाम-पते भी हों. उनके अपने दस्तखत भी हों.... http://news.indiaagainstcorruption.org/annahazaresays/?p=194

(अन्ना के इस ब्लॉग के शीर्षक पे न जाया जाय. असल बात उन्होंने कुछ और ही लिखी है. जिसपे ये तथाकथित कुछ "अन्ना भक्त" ध्यान देना जरुरी नहीं समझते. क्योंकि अन्ना ज़मीन से और पूरे देश से जुड़ने की बात कर रहे और ये जनाब "हवा-हवाई" ही रहना चाहते.).

http://news.indiaagainstcorruption.org/annahazaresays/?p=200

(अन्ना के इस दूसरे ब्लॉग में भी ऐसी ही ज़मीनी बात लिखी गयी है. मगर, ये उड़न-छू क्रांतिकारी एकदम से रॉकेट में सवार होके सीधे संसद में लैंड करना चाहते. ऐसे लोग क्या ख़ाक बनाएंगे स्वस्थ राजनीतिक विकल्प?).

फिलहाल इतना ही... मुझे माफ करना...



आपका एक साथी-
किरण (शंकर) पटनायक.




21 टिप्‍पणियां:

  1. बड़े से बड़ा जन-नेता भी जनता के प्रति जवाबदेही से बच नहीं सकता ... जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए ...
    बहुत ही तल्ख़ टिप्पणियाँ ... लेकिन एकदम सही , सटीक ...
    टीम के अभी के सारे कदम हैरान करनेवाले ... अन्ना के पूरे जीवन में रण-नीतियों को लेकर ऐसी हड़बड़ी पहले तो नहीं देखी गई ...
    नये सिरे से सोचना होगा अन्ना को ... फिर से शुरू करना चाहिए , जन-लोकपाल आंदोलन ... तभी इन जनता इन 'भूलों' को भूल सकेगी ...
    इतना साहसिक , उद्बोधक , रोचक लिखने के लिए बधाई ...
    बहुत ज़रूरी है देशहित में ...

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  2. शुक्रिया आपका. मैं कड़ी बात लिखना नहीं चाहता. मगर, अब इन सबका ऑपरेशन किये बिना काम नहीं चलने वाला. बाबा भी हम जैसे लोगों के सुझावों पे ध्यान दे रहे और उसपे बड़े हद तक अमल करते दिख रहे, मगर ये अन्ना टीम गैंडे की खाल बनी हुई है.. इसे आम लोगों के सुझाव रद्दी की टोकरी जैसे लगते... सो, ऐसी तल्खी... सभी साथी इसकी भाषा के बजाय इसके मुद्दे पे ध्यान दें, तो बड़ी दया.

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  3. mai nahi mannta ki arvind kejriwal jaise innsan ke maan me koi khot ho sakta hai ,aur jaha tak baat hai party aur politics ki tau ,mera ye manna hai ki anna jii ne party bannane me jald baji ki hai ,sabse pehele janlokpal andolan ko desh ke koone konne me failana hoga tabhi kuch hoga warna aise party bannane se wo loog kabhi bhi parliament me nahi paunch sakte ,innke party ka naam suun kar mujhse 1922 ke swaraj party ke yaad aayi ,uss time bhi CR DAS aur MOTI LAL NEHARU ne jaldi baji me party bannaya aur wo party kuch sallo ke baad khatam ho gai ua sahi blo tau congress me mill gai .

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  4. मैंने भी किसी स्थायी खोट की बात नहीं की है. बस, उनके पत्र में जो "खोट" दिखा, उस ओर ही इशारा किया है. कृपया ध्यान से ब्लॉग को पढ़ें तो बात साफ़ हो जाएगी...

    दूसरी बात, अन्ना ने कोई जल्दबाजी नहीं की है... उनके दो ब्लॉग के लिंक भी हिन् इस ब्लॉग में..उसे भी पढ़ें.तो साफ़ हो जाएगा किन वे स्वस्थ विकल्प के लिए देश भर में जन लोकपाल आन्दोलन का पूरा फैलाव चाहते...देखें.

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  5. itS clear that team anna did a fatal mistake by taking a very important decision too early...without any pre meditation ...or self evaluation......though its great decision to give a political alternative to the nation but my question is that now why are they not unite on their decision..??? after-all its not any crime to join politics but they should have clear it before ...they should have a mediation and evaluation among team members. its going to be one week still no confirmation about their mission....a common man like me is very eager to know what their next strategy.....is that really an end of a great mission called INDIA AGAINST CORRUPTION or JANLOKPAL ????? and if its not an end then U guys shud come forward and make this great decision TRUE .....WE ARE ALL WITH YOU TEAM ANNNA

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  6. किरण जी , आप को पता है शुरू से हमे ये बात पता थी की आज की परिस्थिति जो है वो आनेवाली थी, क्यों की अरविन्द और उनकी टीम का यह प्लान अब का नही iac के शुरू से था. इसलिए मुझे कोई ताज्जुब नही हुआ. ये बाते सभी iac के लोग शुरू से २०१४ के विकल्प के बारे में कह रहे थे

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  7. arvind ji ne jo nayi party banane ka faisla liya hai wo bilkul sahi hai. Andolan bhi chalaye aur party bhi banaye. Jo log political party banae ka virodh karte hai wo galat hai.

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  8. Mr arvind kejriwal at the time of ist movement you recd money from public and other sources near to carors and u assured public to give a/c statement every time or month to public ally but u failed to do so and after that you recd lot of public money every time as donation box always u keep with every movements ...where is all this public money and the accounts of expenses ?
    which u never talks about on any platform ? it shows how clean u and your team ...u are just making fool to nation..."vo public ka maal kha kar bhrastacharya karte hain aur aap public se maang maang kar " both are on same track ...i felt shame on u and your team like mind person ...

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  9. मुझे तो अन्ना के अगले कदम का इन्तजार है ? तब तक मै कुछ नहीं कह सकता हु ? अन्ना ने जाते समय जो शब्द बोले थे उनकी पीड़ा दरसा रही थी ! अब देखो अन्ना क्या करते है जल्द ही मालूम हो जायगा

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  10. मैं आपकी बातों से काफी हद तक सहमत हूँ. लेकिन ये आज की बात नहीं है. शुरू से ही अन्ना जी का इस्तेमाल मुखौटे की तरह किया जा रहा था. टीम अन्ना की नियत पर भी लोगों को संदेह होने लगा था. कारण रहा आपसी दरार. इस आंदोलन में अगर अन्ना न होते तो शायद ही जनता का इतना समर्थन मिलता. जिस समय केजरीवाल जी अनशन पर बैठे थे, मैं जंतर-मंतर गई थी. अन्ना जी की कमी साफ़ दिख रही थी. अनशनकारियों से अधिक मीडिया और कार्यकर्ताओं की भीड़ दिखाई दी. कोंग्रेस की रणनीति के साथ-साथ टीम अन्ना के आपसी टकराव की वजह से आंदोलन का ऐसा हश्र हुआ.

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  11. मैं आपकी बातों से काफी हद तक सहमत हूँ, जिस जल्दबाजी में अनशन को तोड़ा गया , उससे समर्थकों में काफी निराशा हुई...
    हालाँकि हम इसे जाहिर नहीं करना चाहते ....
    "तेरी बेवफाई का शिकवा करूँ तो ये मेरे मुहब्बत की तौहीन होगी"
    और फिर तुष्टिकरण की नीति ने भी काफी निराश किया....

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  12. अलग दल बनाने का कम से कम मैं विरोध नहीं कर रहा. जो लोग मेरे ब्लोग्स को ठीक से नहीं पढ़ रहे, वे ही ऐसा बोल-समझ रहे.. अलग स्वस्थ दल बने, मगर अन्ना जी के बताए रास्ते से... ज़मीनी रास्ते से. हवा-हवाई में बना दल अंततः भ्रष्ट ही होना है.

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  13. kiran ji abhi tak koi Dal ya party iac ne nhi bnayi hai !! mera aapse sirf itna anurodh hai ki kripya thoda Dhairya Rakhe or thoda Intezaar kre arvind or baaki sabhi anna movement k sathi sabhi anna ji ke decision's hi follow krte hai ! sabse pahle iac ko apni sithi saaf krne ka mouka dijye !!!

    Jaldbaazi mai kuch khna tik nhi hoga !!

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  14. पता है मुझे कि कोई दल नहीं बना है. और, अभी बनना भी नहीं चाहिए. अभी सभी अग्रणी कार्यकर्ता जाएँ मुहल्लों में..गांवों में जंगल के गांवों में..दो साल तक अन्ना और गांधी की तरह देश में घूमें..पाँव-पैदल..साइकिल से, बैल गाडी से, जीप से या बस से... लोगों के बीच जन लोकपाल आन्दोलन को फैलाते चलें... उसके बाद ही कोई दल- वल की बात हो...

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    1. please sue the Arvind and take money from congress to publish such rubbish.

      हटाएं
  15. इंडिया अगेंस्ट करप्सन के आंदोलन में समर्पित वालंटियरों को संबोधित करते हुए श्री अरविन्द केजरीवाल ने जंतर मंतर पर २५ जुलाई को किये आमरण अनशन को समाप्त करनेसे सम्बंधित , आंदोलन का देश हित में सरकार द्वारा मूल्यांकन न करने से उत्पन्न निराशा,एवं विकल्प स्वरुप राजनैतिक मार्ग से आंदोलन अथवा भ्रष्ट सरकार को सत्ताच्युत करके देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने के बारे में अपने ब्लाग में स्पष्ट घटनाक्रम का क्रमवार वर्णन किया है, क्योंकि तमाशाई दर्शकों द्वारा आंदोलन कारियों का मखौल उड़ाकर मजा लेने के लिए फेसबुक या मोबाइल पर की गई आलोचनाओं और प्रतिक्रियाओं का कुप्रभाव इस आंदोलन में तन,मन,धन से समर्पित वालंटियर्स के मन को दुखित करता है| ये फेस्बुकी मखौल्ची बेचारे नहीं समझते कि अनेक विज्ञानों की तरह राजनीति भी विज्ञान है | केवल समाचार पत्रों को पढकर और टीव्ही देखकर राजनैतिक विशेषज्ञ और राजनैतिक समालोचक नहीं बना जा सकता है|यदि आप यह जानना चाहे कि आपके आस पास और दूर दराज इलाके में कुल कितने डाक्टर हैं, तो आप एक झूठा ही बहाना बना कर देख लीजिए,आपको जितने लोग मिलते जाये सबसे कहिये कि "मुझे खांसी आने लगी है" आपको सभी लोग कोई न कोई नुसखा बता देंगे परन्तु उनमे डाक्टर कोई नहीं होगा |इसी तरह आपको फेसबुक में अन्ना के आंदोलन के बड़े बड़े ज्ञाता मिलते हैं जिन्होंने राजनैतिक विज्ञान की पुस्तक को हाथ भी नहीं लगाया होगा पर अरविन्द केजरीवाल को राजनीति की बे सिर पैर की सलाह देने में एक दूसरे से पीछे नहीं हैं|

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  16. Arvind Ji ka khot kaya hai- us ne sari kamai, sara bank balance ko logo ke dukho ko dur karne me Lagan diya. Diabetes ka patient hote hue bhi corruption se nijat dilane ke liye apni jan tak dav pe Lagan di . Agar apne andolan ko koi dusra roop dene ka faisla liya hai to kaya khot ho gya. Is ki to abhi roop dekha bhi tayar nahi hui . Dukh is bat ka hai ki am logo ki vayatha koi ni samajh raha. Diwar par likhi ja chuki ibadat ko koi rajneta nahi dekh pa raha, tabhi to halat bad se badtar hote ja rahehai

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  17. केजरीवाल ने अंध भक्तो मे से कोई वीर किसी डॉक्टर से जाकर पूछे की कैसे एक शुगर का मरीज कितने दिनो तक बिना खाये जिंदा रह सकता है॥ मीडिया की पास इनको दबा कर खाते हुये देखा है॥ये बहुत बड़ी नौटंकी थी जिसमे अनशन नही बल्कि रोजा रखा गया था॥रात मे दबा कर खा लो सुबह से नाटक चालू॥ देश को केजरीवाल नाम का ञ नेहरू मिल ज्ञ है जो 4 को चालीस बताने मे उसताज है और गांधी की तरह अन्न का उपयोग करके पावर पाना छटा है॥मई लिख कर दे सकता हु की अभी आगे समय आने दो, इतकी नीयत सामने आ जाएगी॥अच्छी बाते तो नेहरू भी करता था उसने भी कितबे लिखी है लेकिन देश को निपटने मे सबसे बड़ा उसी का हाथ था॥केजरीवाल जी फोर्ड फ़ाउंडेशन से पैसा लेकर दुकान चला रहे है अब और संजय सिंह जैसे टुच्चों चमचो को साथ लेकर चलते है॥

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  18. हम जानते हैं कि हमारे आस-पास ऐसे विश्वस्त व्यक्ति मौजूद हैं जो गुमनामी के अंधेरे में खोये हुये हैं, जिन्हें अगर मौका मिले तो वे इस देश की न सही मगर अपने क्षेत्र की काया पलट कर सकते हैं, हमें उन्हें अपने-अपने क्षेत्र में खोजने का कार्य प्रारंभ करना चाहिये और उन्हें उचित जिम्मेदारी देना चाहिये जिससे वह कम से कम अपने क्षेत्र की तरक्की तो कर ही सकें बस जरूरत है आप सबके सहयोग की, उन्हें चिन्हित करें और जनता के सामने ले कर आयें| http://bvbja.com/NewPersonPage.aspx?st=16&dt=1635&wt=231&GroupID=231

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  19. Bahut hi ghatiye tarike se likha gaya post hai...aapko asahmati ho sakti hai par use vyakt karne ka tarika hota hai. Main aapki tarah bhasa ka prayog nahin karna chata par aapne apne upar ke blog mein Arvind Kejriwal se apni vicharo ki asahmati nahin dikhayi hai apitu kisi aur baat ki bhadaas nikali hai...

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