भ्रष्टाचार विरोधी महायज्ञ आरंभ हो चुका है. इसे नष्ट-भ्रष्ट करने के लिए राक्षसों की टोली भी जोर-शोर से सक्रिय हो चुकी है.
एक बार फिर से अमर सिंह को मुखौटे के रूप में इस्तेमाल करके भ्रष्टाचारी ताकतें अपने बचाव में जुट गयी हैं. इसी अमर सिंह ने सांसदों को खरीद कर मनमोहन-सोनिया सरकार को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी. इस बारे में सबको पता है. यह एक खुला रहस्य है.
अब फिर उसी अमर सिंह को तमाम भ्रष्टाचारियों ने आगे कर दिया है. सिर्फ वही नहीं, शरद पवार की पार्टी के विभिन्न नेता, लालू प्रसाद के राजद के नेता, डीएमके नेता, शिव सेना नेता, और सर्वोपरि कांग्रेस नेता भी किसी न किसी रूप में इस महायज्ञ को नष्ट-भ्रष्ट करने में दिन-रात एक किये हुए हैं. खबरों की खबर रखने वालों को इन सारी बातों का पता है. इस ब्लॉग के कुछ आलेखों में भी इसका जिक्र किया गया है.
जन लोकपाल समिति की पहली बैठक के ठीक पहले जिस तरह से इस समिति के एक अध्यक्ष श्री शांति भूषण के खिलाफ सरासर झूठा ऑडियो कैसेट जारी किया गया, उससे जाहिर हो जाता है कि देश को लूटने वालों की टोली समिति के नागरिक सदस्यों को बदनाम करने के लिए कोई भी हथकंडा अपना सकते हैं. उनके पुत्र और जनता के पक्ष में तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वाले प्रशांत भूषण ने इस पर साफ़-साफ़ अपनी और अपने पिता का पक्ष रखा है. जिसका जवाब न तो अमर सिंह ने दिया और न ही अन्य किसी ने. इस तरह के भ्रमित करने वाले और झूठे आरोपों से आम लोगों को बचकर रहने और इस भ्रष्टाचार विरोधी माह-आंदोलन को इसकी अंतिम मंजिल तक पहुंचाने की जरुरत है.
फिलहाल इतना ही. बाद में और भी.
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शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011
गुरुवार, 14 अप्रैल 2011
भ्रष्टाचार का दूसरा नाम शरद पवार
शरद पवार को बिना देर लगाए तुरंत केंद्र सरकार से निकाल देना चाहिए, वरना और न जाने कितने भ्रष्टाचार के मामले सामने आएँगे.
जहाँ भी हाथ डालो शरद पवार का भ्रष्टाचार सामने आ जाएगा. खाद्य पदार्थों की अंधाधुंध महँगाई की बात हो या आईपीएल के महा घोटाले की या २ जी घोटाले की बात हो या तेलगी का अरबों का घोटाला. सब जगह पवार और उसके परिवार और उसके दल के नेताओं का नाम पाया जा सकता है.
प्याज, अंगूर, चीनी, सहित तमाम तरह के खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ाकर करोड़ों रुपए कमाने वाले पवार एंड कम्पनी ने ग़रीबों के मुंह से निवाला छीन लेने का दुष्कर्म किया है. ऐसे मंत्री को मनमोहन सिंह की भ्रष्ट सरकार ही बर्दाश्त किये हुए हुई. वरना कोई अन्य सरकार होती तो पवार को कबका मंत्रिमंडल से धकिया दिया जाता. "गठबंधन धर्म" का नाम लेकर मनमोहन-सोनिया इस महा-भ्रष्टाचारी को पाल-पास रहे हैं.
दरअसल, पवार के जरिए खुद कांग्रस भी अपना उल्लू सीधा कर रही है. ध्यान दें कि पहले सिर्फ पवार को महंगाई का दोषी ठहराया जाता था, लेकिन बाद में खुद प्रणव मुखर्जी, मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी शरद पवार की बोली बोलने लग गए .
शरद पवार जिस तरह सिर से पाँव तक भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं ठीक उसी तरह पूरी कांग्रेस भी. प्रधान मंत्री की नाक तले सारे भ्रष्टाचार होते हैं, लेकिन बेचारे भोले-भाले, ईमानदार, स्वच्छ मनमोहन को इसका पटा ही नहीं चलता!
शरद को हटाया तो पूरी कांग्रेस का भ्रष्टाचार भी एक-एक कर सामने आ जाएगा. ए. राजा के हटाने से पहले भी कांग्रेस इसी दुविधा में थी. लेकिन करूणानिधि के साथ किसी अंदरूनी "समझौते" के तहत ए. राजा को गिरफ्तार करके मनमोहन-सोनिया खुद को बड़े शुद्ध दिखाने में जुट गए. लेकिन पवार के ऊपर कोई "करूणानिधि" नहीं है. वे खुद ही सर्वेसर्वा हैं. ऐसे में उन्हें हटाना लगभग असंभव है, क्योंकि उनका मुंह बंद नहीं किया जा सकता.
ऐसी हालत में इस मनमोहन-सोनिया-राहुल सरकार को ही हटाना जरुरी हो गया है. पवार, मनमोहन, सोनिया, राहुल, करूणानिधि, ममता, फारुख आदि सभी एक ही भ्रष्ट थैली के चाटते-बट्टे हैं. ममता का नाम यहां इसीलिए लिया गया क्योंकि सारे भ्रष्टाचार उनकी आंखों के सामने एक-एक कर सामने आ रहे हैं और वे गांधी की तीन बन्दर की नकल कर रही हैं. यह उनका असली चेहरा है.
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